फाइब्रोस्कैन (FibroScan) लिवर की सेहत जांचने के लिए एक आधुनिक, दर्द-रहित और नॉन-इनवेसिव (बिना चीर-फाड़ वाला) टेस्ट है。यह अल्ट्रासाउंड की तरह काम करता है और मुख्य रूप से लिवर में फैट (चर्बी), कठोरता (Stiffness), और फाइब्रोसिस (निशान) का सटीक स्तर मापता है。
फाइब्रोस्कैन टेस्ट के मुख्य उपयोग:
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- फैटी लिवर का पता लगाना: यह लिवर में वसा या चर्बी की मात्रा (CAP score) को मापता है, जिससे फैटी लिवर की समस्या की पहचान होती है。
- फाइब्रोसिस और सिरोसिस की जांच: यह लिवर के टिशू में आने वाली कठोरता (Stiffness) को मापता है। इससे लिवर में सूजन या फाइब्रोसिस (लिवर पर घाव या निशान) की गंभीरता का स्तर आसानी से पता चल जाता है。
- लिवर बायोप्सी का विकल्प: पहले फाइब्रोसिस जांचने के लिए लिवर बायोप्सी (टुकड़ा निकालने की प्रक्रिया) करनी पड़ती थी, जो दर्दनाक थी। फाइब्रोस्कैन बिना किसी चीरे या सुई के उसी काम को सुरक्षित तरीके से करता है。
- लिवर रोगों की निगरानी: हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, या अत्यधिक शराब पीने वाले मरीजों के लिवर को हुए नुकसान पर नज़र रखने के लिए यह टेस्ट उपयोगी है。
यह टेस्ट किसे करवाना चाहिए?
डॉक्टर आमतौर पर उन मरीजों को यह सलाह देते हैं जिन्हें:
डॉक्टर आमतौर पर उन मरीजों को यह सलाह देते हैं जिन्हें:
- लंबे समय से फैटी लिवर की शिकायत हो。
- मधुमेह (Diabetes) या मोटापे की समस्या हो。
- लिवर एंजाइम (LFT) की रिपोर्ट असामान्य आई हो。
इस टेस्ट के लिए आमतौर पर 3 से 4 घंटे के उपवास (खाली पेट) की आवश्यकता होती है। यह परीक्षण केवल 5-10 मिनट में पूरा हो जाता है और इसके कोई दुष्प्रभाव (Side-effects) नहीं होते
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