कॉर्टिसोल (Cortisol) टेस्ट आपके रक्त, मूत्र या लार में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) के स्तर को मापता है。इसका मुख्य उपयोग अधिवृक्क (Adrenal) और पिट्यूटरी (Pituitary) ग्रंथियों की कार्यप्रणाली की जांच करना, और कुशिंग सिंड्रोम (अधिक कॉर्टिसोल) व एडिसन रोग (कम कॉर्टिसोल) जैसी स्थितियों का निदान करना है。
कॉर्टिसोल टेस्ट के प्रमुख उपयोग और उद्देश्य:
- कुशिंग सिंड्रोम का निदान: यदि शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो इससे चेहरे पर सूजन, तेजी से वजन बढ़ना और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं。
- एडिसन रोग का पता लगाना: कॉर्टिसोल की कमी के कारण अत्यधिक थकान, लो ब्लड प्रेशर, वजन घटना और त्वचा पर काले धब्बे जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसकी जांच इस टेस्ट से की जाती है。
- तनाव प्रतिक्रिया का आकलन: यह टेस्ट किसी बीमारी या चोट के दौरान शरीर के तनाव प्रतिक्रिया का आकलन करने में मदद करता है。
- उपचार की निगरानी: हार्मोनल विकारों या स्टेरॉयड दवाओं के इलाज के बाद यह जांचने के लिए किया जाता है कि दवाएं शरीर पर कैसा असर कर रही हैं。
लक्षण जिन पर डॉक्टर यह टेस्ट लिखते हैं:
यदि आप बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार थकान, अचानक वजन में बदलाव, चिंता या अवसाद, और त्वचा में असामान्य परिवर्तन (जैसे आसानी से नील पड़ना) महसूस करते हैं तो डॉक्टर कॉर्टिसोल परीक्षण का सुझाव दे सकते हैं
यदि आप बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार थकान, अचानक वजन में बदलाव, चिंता या अवसाद, और त्वचा में असामान्य परिवर्तन (जैसे आसानी से नील पड़ना) महसूस करते हैं तो डॉक्टर कॉर्टिसोल परीक्षण का सुझाव दे सकते हैं
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