फ्लूइड टेस्ट’ (Fluid Test) आमतौर पर शरीर के विभिन्न हिस्सों में जमा हुए तरल पदार्थ (जैसे पेट, फेफड़ों, या जोड़ों) की जांच को संदर्भित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य असामान्य रूप से जमा हुए द्रव के कारण, संक्रमण (इंफेक्शन), सूजन या कैंसर का पता लगाना और उनका सही इलाज सुनिश्चित करना होता है。
शरीर के विभिन्न हिस्सों के आधार पर फ्लूइड टेस्ट के प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:
- पेरिटोनियल फ्लूइड टेस्ट (एसाइटिक फ्लूइड): यह पेट की गुहा में जमा हुए तरल (Ascites) की जांच के लिए होता है। इसका उपयोग लिवर सिरोसिस, पेट के टीबी, या कैंसर के कारण पेट में पानी भरने के निदान के लिए किया जाता है。
- प्ल्यूरल फ्लूइड टेस्ट: फेफड़ों के आसपास की झिल्ली (Pleura) में जमा द्रव की जांच करने के लिए किया जाता है。 इससे फेफड़ों के संक्रमण, निमोनिया, हार्ट फेलियर या ट्यूमर का पता चलता है。
- सिनोवियल फ्लूइड टेस्ट: जोड़ों में जमा तरल पदार्थ की जांच, जो मुख्य रूप से गठिया (Arthritis), जोड़ों में संक्रमण या चोट का पता लगाने के लिए की जाती है。
प्रक्रिया के दौरान सुई की मदद से थोड़ा सा तरल निकाल कर लैब में विश्लेषण (Analysis) के लिए भेजा जाता है
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