एएफपी (अल्फा-फेटोप्रोटीन) टेस्ट एक ब्लड टेस्ट है जो रक्त में एएफपी प्रोटीन के स्तर को मापता है। इसका मुख्य उपयोग गर्भावस्था के दौरान बच्चे में जन्मजात विकारों का पता लगाने और वयस्कों में लिवर कैंसर या अन्य ट्यूमर की जांच के लिए किया जाता है。
गर्भावस्था में उपयोग
यह आमतौर पर प्रेगनेंसी के 15वें से 20वें सप्ताह के बीच (क्वाड मार्कर टेस्ट के हिस्से के रूप में) किया जाता है:
- न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट: रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क से जुड़े जन्मजात दोषों (जैसे स्पाइना बिफिडा) की जांच करना。
- आनुवंशिक विकार: डाउन सिंड्रोम जैसी गुणसूत्र संबंधी असामान्यताओं का अनुमान लगाना。
- जुड़वां बच्चों का पता लगाना: यदि एएफपी का स्तर सामान्य से अधिक है, तो यह एक से अधिक भ्रूण (जुड़वां) होने का संकेत हो सकता है。
गैर-गर्भवती (वयस्कों) में उपयोग
गैर-गर्भवती पुरुषों और महिलाओं में, इसका उपयोग ट्यूमर मार्कर के रूप में किया जाता है:
- लिवर कैंसर की जांच: हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) और सिरोसिस या हेपेटाइटिस जैसी गंभीर लिवर बीमारियों के निदान में मदद करना。
- अन्य कैंसर: अंडकोष (Testicular) और अंडाशय (Ovarian) के कुछ खास ट्यूमर की जांच करना。
- उपचार की निगरानी: कैंसर के इलाज (कीमोथेरेपी आदि) के दौरान मरीज की रिकवरी और दवाइयों के असर को ट्रैक करना
An Alpha-fetoprotein (AFP) test is a blood test that measures AFP levels. In pregnant individuals, it screens for fetal genetic disorders and birth defects (weeks 15–20). In non-pregnant adults, it serves as a “tumor marker” to diagnose or monitor cancers (like liver or testicular cancer) and liver diseases
anad tiwari –
mere pet me tumar ka pata laxmi path lab ki jach report me nikla uske bad hum sgpgi me mera elaz hua aur hum ab thek hi mera opration 10 jun ko hona hi