एसिड फॉस्फेटेज (ACP) एक एंजाइम है जो शरीर के कई हिस्सों में पाया जाता है, लेकिन इसकी सबसे अधिक मात्रा प्रोस्टेट ग्रंथि में होती है。इस टेस्ट का मुख्य उपयोग प्रोस्टेट कैंसर की जांच, उसकी स्टेज का पता लगाने और इलाज की निगरानी करने के लिए किया जाता है।
एसिड फॉस्फेटेज (ACP) टेस्ट के मुख्य उपयोग
- प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाना: प्रोस्टेट ग्रंथि में कैंसर होने पर या ट्यूमर के फैलने पर रक्त में एसीपी (ACP) का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह टेस्ट इसी वृद्धि को पकड़ने के लिए किया जाता है。
- बीमारी की स्टेज जांचना: इस टेस्ट से यह तय करने में मदद मिलती है कि प्रोस्टेट कैंसर केवल प्रोस्टेट तक सीमित है या शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे हड्डियों) तक फैल गया है。
- इलाज की निगरानी (Monitoring): प्रोस्टेट कैंसर का इलाज (जैसे सर्जरी या हार्मोन थेरेपी) कितना प्रभावी है, यह जांचने के लिए समय-समय पर एसीपी टेस्ट किया जाता है। यदि इलाज सफल होता है, तो एसीपी का स्तर कम हो जाता है।
- फोरेंसिक जांच (Forensic/Sexual Assault Cases): वीर्य (Semen) में एसिड फॉस्फेटेज भरपूर मात्रा में होता है। इसलिए, यौन अपराधों के मामलों में योनि स्राव या कपड़ों पर वीर्य की उपस्थिति का पता लगाने के लिए इस एंजाइम का टेस्ट किया जाता है。
यह टेस्ट क्यों और कब किया जाता है?
डॉक्टर आमतौर पर तब यह टेस्ट लिखते हैं जब मरीज को पेशाब करने में परेशानी, बार-बार पेशाब आना, या पेल्विक क्षेत्र में दर्द जैसे लक्षण महसूस होते हैं, जो प्रोस्टेट की समस्याओं का संकेत हो सकते हैं。
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Neeraj