GFR (ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट) टेस्ट का मुख्य उपयोग यह मापना है कि आपकी किडनी (गुर्दे) एक मिनट में कितना खून साफ़ करती हैं। यह टेस्ट मुख्य रूप से किडनी की कार्यक्षमता (कार्य करने की क्षमता) का आकलन करने और क्रोनिक किडनी रोग (CKD) का पता लगाने के लिए किया जाता है।
GFR टेस्ट के मुख्य उपयोग
- किडनी की कार्यक्षमता जांचना: यह पता लगाने के लिए कि आपकी किडनी कितनी अच्छी तरह अपशिष्ट (कचरे) और अतिरिक्त तरल पदार्थ को खून से फ़िल्टर कर रही है।
- किडनी की बीमारी का पता लगाना: बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी क्रोनिक किडनी रोग (CKD) की शुरुआत का कुशलतापूर्वक पता लगाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण परीक्षण है।
- बीमारी की स्टेज तय करना: अगर किडनी की बीमारी है, तो यह टेस्ट बीमारी की गंभीरता और उसकी स्टेज (चरण) तय करने में मदद करता है।
- उपचार की निगरानी: जिन लोगों को पहले से किडनी की समस्या, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनकी स्थिति में सुधार या गिरावट पर नज़र रखने के लिए यह टेस्ट उपयोगी है।
सामान्य स्तर और परिणाम (eGFR)
- 90 mL/min या उससे अधिक: सामान्य (स्वस्थ किडनी)।
- 60 से 89 mL/min: हल्के स्तर की कमी।
- 60 mL/min से कम: यदि यह स्तर लगातार 3 महीने या उससे अधिक रहता है, तो इसे क्रोनिक किडनी रोग माना जाता है।
- 15 mL/min से कम: किडनी फेलियर की अंतिम अवस्था (End-Stage Renal Disease)।
यह टेस्ट क्यों और कब किया जाता है?
डॉक्टर आमतौर पर आपको यह टेस्ट कराने की सलाह देते हैं यदि:
- आपको मधुमेह (Diabetes) या उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) हो।
- परिवार में किसी को किडनी की बीमारी हो।
- किडनी की बीमारी के लक्षण दिखें, जैसे पेशाब के रंग या मात्रा में बदलाव, पैरों या टखनों में सूजन, या अत्यधिक थकान।
A Glomerular Filtration Rate (GFR) test measures how effectively your kidneys filter waste and excess fluid from your blood. Usually performed as an Estimated GFR (eGFR) via a routine blood draw, it is the primary diagnostic tool for detecting and staging Chronic Kidney Disease (CKD
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