जीजीटी (GGT) टेस्ट एक रक्त परीक्षण है जिसका उपयोग मुख्य रूप से लीवर की क्षति, बीमारियों और पित्त नली की समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह अत्यधिक शराब के सेवन की पहचान करने और लीवर फंक्शन को ट्रैक करने में भी अत्यंत सहायक है।
जीजीटी (GGT) टेस्ट के मुख्य उपयोग:
- लिवर की बीमारी: हेपेटाइटिस (लिवर में सूजन) और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का निदान करने के लिए।
- पित्त नली में रुकावट: पित्त की थैली या नली में पथरी या ट्यूमर जैसी रुकावटों की पहचान करने के लिए।
- शराब की लत का आकलन: जो लोग लंबे समय तक शराब का सेवन करते हैं, उनके लिवर को हुई क्षति का पता लगाने में यह बहुत संवेदनशील परीक्षण है।
- दवाइयों के साइड-इफेक्ट्स: कुछ दवाओं के कारण लिवर पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों की निगरानी करने के लिए।
- अन्य टेस्ट के परिणामों की पुष्टि: यदि अन्य लिवर टेस्ट (जैसे ALP) के परिणाम असामान्य आते हैं, तो यह पता लगाने के लिए कि समस्या लिवर में है या हड्डियों में।
आपको यह टेस्ट कब करवाना चाहिए?
यदि आपमें निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर यह टेस्ट लिख सकते हैं:
- पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना)
- लगातार थकान या कमजोरी
- भूख न लगना या जी मिचलाना
- पेट में दर्द या सूजन
- गहरे रंग का पेशाब और हल्के रंग का मल
नॉर्मल रेंज
वयस्कों और बच्चों के लिए जीजीटी (GGT) की सामान्य सीमा आम तौर पर 0 से 30 अंतर्राष्ट्रीय यूनिट प्रति लीटर (U/L) के बीच होती है। यदि इसका स्तर बहुत अधिक आता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको कोई गंभीर बीमारी (जैसे कैंसर) ही है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत है कि आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करके आगे के परीक्षण करवाने चाहिए
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